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क्या एक महिला अकेले समाज की धारणाओं को बदल सकती है? "यशोधरा जीत गई" उपन्यास में रंगेय राघव ने एक ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी को प्रस्तुत किया है, जो महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और संघर्ष की मिसाल है।
यह उपन्यास महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक बदलाव की आवश्यकता पर जोर देता है। यशोधरा का अडिग साहस और मेहनत यह दर्शाती है कि जब कोई व्यक्ति अपने सिद्धांतों पर अडिग रहता है, तो वह परिवर्तन की धारा को मोड़ सकता है।
अगर आप समाज में महिलाओं की स्थिति और उनके संघर्षों को समझना चाहते हैं, तो यह पुस्तक आपके लिए है। इसमें सामाजिक मुद्दों, मानवीय संवेदनाओं और एक नई सोच को बड़े प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
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