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Shrikant (Vol.-1) by Sharat Chandra Upadhyay

Shrikant (Vol.-1) by Sharat Chandra Upadhyay

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शरत चंद्र चट्टोपाध्याय का उपन्यास "श्रीकांत" भारतीय साहित्य का एक महत्वपूर्ण रत्न है। यह उपन्यास एक ऐसे व्यक्ति के जीवन की कहानी है जो समाज के दबावों, अपनी ही कमजोरियों और जीवन के उतार-चढ़ाव से जूझता है।

  • मानवीय संघर्षों का यथार्थवादी चित्रण: उपन्यास में श्रीकांत के जीवन के माध्यम से मानवीय संघर्षों को बड़ी खूबसूरती से चित्रित किया गया है। प्रेम, मोह, अकेलापन, असफलता और जीवन के अर्थ जैसे गहरे विषयों को शरत चंद्र ने बड़ी संवेदनशीलता से छुआ है।
  • सामाजिक परिवर्तन का आईना: "श्रीकांत" उस समय के भारतीय समाज के परिवर्तन को बड़ी स्पष्टता से दर्शाता है। औपनिवेशिक काल के प्रभाव, सामाजिक रूढ़ियों और नवीन विचारों के बीच संघर्ष को इस उपन्यास में बड़ी स्पष्टता से देखा जा सकता है।
  • शरत चंद्र की लेखन शैली: शरत चंद्र की लेखन शैली सरल और सहज है, लेकिन साथ ही गहराई से प्रभावित करने वाली भी। उनकी भाषा इतनी जीवंत है कि पाठक खुद को कहानी में खो जाते हैं।
  • पात्रों का गहरा विश्लेषण: उपन्यास में श्रीकांत के अलावा भी कई अन्य पात्र हैं, जिनके माध्यम से समाज के विभिन्न पहलुओं को उजागर किया गया है।
  • समाज और संस्कृति का गहरा ज्ञान: इस उपन्यास को पढ़कर आप बंगाली समाज और संस्कृति के बारे में बहुत कुछ जान सकते हैं।
  • आधुनिक समाज के लिए प्रासंगिकता: भले ही यह उपन्यास 1917 में लिखा गया था, लेकिन इसकी थीम आज भी प्रासंगिक हैं। प्रेम, मोह, व्यसन और सामाजिक असमानता जैसी समस्याएं आज भी हमारे समाज में मौजूद हैं।


"श्रीकांत" एक ऐसा उपन्यास है जिसे हर साहित्य प्रेमी को पढ़ना चाहिए। यह एक ऐसा उपन्यास है जो आपको भावुक करेगा, सोचने पर मजबूर करेगा और जीवन के बारे में आपकी समझ को गहरा करेगा।

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