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दुखवा मैं कासे कहूं जैसी कालजयी कहानी के महान कथा-शिल्पी आचार्य चतुरसेन का कथा-संसार साहित्य के इतिहास में सबसे अलग, अनूठी और बेशकीमती पहचान रखता है। कहानियों के अलावा कुछ उपन्यास तो इतने लोकप्रिय हुए कि अपने आप में कीर्तिमान बन गए। आचार्य चतुरसेन की कथा-यात्रा में 32 उपन्यास और क़रीब 450 कहानियों के मील-स्तम्भ जुड़े हुए हैं। वह नाटकों के भी अद्भुत चितेरे थे। इसके अतिरिक्त अलग-अलग विषयों पर भी लिखते रहे और इस तरह उनकी छपी हुई पुस्तकों की क़तार ने 186 की आकर्षक संख्या को छू लिया। ऐतिहासिक कहानियों और उपन्यासों के लिए तो उन्हें सर्वोच्च रचनाकार माना गया। हिन्द पाॅकेट बुक्स ने हमारे युग के इस सर्वश्रेष्ठ गल्पकार आचार्य चतुरसेन की सम्पूर्ण कहानियों को सिलसिलेवार एक साथ प्रकाशित करने की योजना के अन्तर्गत 5 भागों में संकलित किया है। इन कहानियों की यह विशेषता है कि ये सर्वथा प्रामाणिक मूल पाठ हैं, जो सभी पाठकों के साथ-साथ हिन्दी कहानियों के अध्येताओं और शोधार्थियों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। ‘दुखवा मैं कासे कहूं’ उनकी सम्पूर्ण कहानियों की दूसरी कड़ी है। इसमें 26 कहानियां दी गई हैं। सम्पूर्ण कहानियों का पहला भाग ‘बाहर-भीतर’ है।
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