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PATANGWALA AUR ANYA KAHANIYAN

PATANGWALA AUR ANYA KAHANIYAN

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✔✔सभी ने महमूद की बनाई ड्रैगन-पतंग के बारे में सुन लिया था और कहने लगे कि वह पतंग तिलिस्मी है। ✔✔जब नवाब साहब के सामने उड़ाने के लिए वह पतंग पेश की गई, तब अच्छी-खासी भीड़ जमा हो गई थी। ✔✔पहली कोशिश फिजूल गई, पतंग जमीन से उठी नहीं। बस कागज के गोलों ने एक रुआँसी व शिकायत भरी सरसराहट की; हिलने से पतंग की आँखें, जो कि शीशों की बनी थीं, सूरज की रोशनी में चमक उठीं और पतंग एक जानदार चीज सी लगने लगी। फिर सही दिशा से हवा आई और ड्रैगन-काइट आसमान में उठ गई, इधर-उधर छटपटाते हुए वह ऊपर उठने लगी—ऊँची, और ऊँची। सूरज की रोशनी में शीशे लगी आँखें शैतानी से चमकने लगीं। ✔✔जब यह बहुत ही ऊपर उठ गई तो हाथ में पकड़ी रस्सी पर जोरों का झटका लगने लगा।रस्सी टूट गई, पतंग सूरज की तरफ लपकी, आसमान की ओर शान से जाने लगी और फिर आँखों से ओझल हो गई। वह पतंग फिर कभी मिली नहीं और महमूद ने सोचा कि उसने पतंग में जीवन भर दिया था। ★★इसी पुस्तक से रस्किन बॉण्ड की कहानियों में एक अद्भुत सजीवता है★★✔✔सीधी-सरल भाषा में लिखी ये कहानियाँ सहज ही मन को छू लेती हैं। उनके पात्र हमारे आसपास के जीवन से जुड़े हैं; वे सामान्य भी हैं और सामान्य से कुछ हटकर भी हैं। ✔✔दिन-ब-दिन के जीवन से गुँथे रहस्य, प्रेम, कर्तव्य आदि भावनाओं से पगी ये कहानियाँ बरबस अपनी ओर खींचती हैं।

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