{"product_id":"kashmiri-kissago-tales-from-the-heartland-of-kashmir-by-ruskin-bond-hindi-edition","title":"Kashmiri Kissago: Tales from the Heartland of Kashmir by Ruskin Bond (Hindi Edition)","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eकोई चालीस साल पहले जब मैंने ये लोक और परी कथाएँ लिखी थीं तो मैंने एक वृद्ध कश्मीरी किस्सागो का उपयोग किया था; जो सर्दियों की शाम को अपनी अँगीठी जलाकर बैठ जाता था और लंढौर बाजार में अपनी दुकान पर आनेवाले बच्चों का मनोरंजन किया करता था।\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eइस प्रकार ये सब आपके सामने हैं। इन कहानियों में वर्णित कश्मीर कभी का जा चुका है; लेकिन बच्चे अभी भी आस-पास हैं और मैं उनके बारे में समय-समय पर सुनता रहता हूँ। ‘नन्हा विजय’ अब पचास के करीब है; जबकि चुटियावाली शशि दादी बन चुकी है। मैं सोचता हूँ; क्या वे अपने बच्चों और पोते-पोतियों को कहानियाँ सुनाते होंगे या बस; उन्हें अपने लैपटॉप और टी.वी. सेटों के हवाले छोड़ देते होंगे?\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eकहानी सुनाने की मौखिक परंपरा तो अब समाप्त ही हो चुकी है; लेकिन लिखे हुए शब्द अभी भी बने हुए हैं। ये इतनी आसानी से लुप्त नहीं होंगे। इनके माध्यम से हम अतीत की समीक्षा कर सकते हैं; बहुत पहले की दुनिया में विचरण कर सकते हैं और उसके प्राचीन जादू के कुछ अंश को प्राप्त कर सकते हैं।\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003e—रस्किन बॉण्ड (भूमिका से)\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eबेहतरीन कहानीकार रस्किन बॉण्ड की ये लोक-परी कथाएँ आपको अपने बचपन में ले जाएँगी और आपको सोचने पर मजबूर करेंगी कि अब के बच्चों के बचपन से किस्सागोई कहाँ खो गई!\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Mohit Publishers and Educational Aids","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48142562525429,"sku":"69356","price":180.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0755\/3099\/3909\/files\/93.webp?v=1778564407","url":"https:\/\/www.mohitpublishers.com\/products\/kashmiri-kissago-tales-from-the-heartland-of-kashmir-by-ruskin-bond-hindi-edition","provider":"Mohit Publishers and Educational Aids","version":"1.0","type":"link"}