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Karmabhoomi (Novel) By Premchand (Prabhat Prakashan)

Karmabhoomi (Novel) By Premchand (Prabhat Prakashan)

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  • प्रेमचंद आधुनिक हिंदी साहित्य के कालजयी कथाकार हैं और उनकी कहानियाँउपन्यास और लघुकथाओं में विभिन्न सामाजिक मुद्दों का विवेचन किया गया है।
  • उन्होंने लगभग पैंतीस वर्ष की साहित्य-साधना के दौरान चौदह उपन्यासों और तीन सौ कहानियों की रचना की।
  • प्रेमचंद का उपन्यास 'सेवासदन' वेश्या-समस्या और उसके समाधान का चित्रण करता है, जो हिंदी मानस के लिए नई विषयवस्तु थी।
  • 'प्रेमाश्रम' में जमींदार-किसान के संबंधों और पश्चिमी सभ्यता के पड़ते प्रभाव का उद्घाटन किया गया है।
  • 'रंगभूमि' में सूरदास के माध्यम से गांधी के स्वाधीनता संग्राम का बड़ा व्यापक चित्रण है।
  • 'कायाकल्प' में शारीरिक एवं मानसिक कायाकल्प की कथा है।
  • 'निर्मला' में दहेज-प्रथा तथा बेमेल-विवाह के दुष्परिणामों की कथा है।
  • 'प्रतिज्ञा' उपन्यास में पुनः 'प्रेमा' की कथा को कुछ परिवर्तन के साथ प्रस्तुत किया गया है।
  • 'गबन' में युवा पीढ़ी की पतन-गाथा है और 'कर्मभूमि' में देश के राजनीति संघर्ष को रेखांकित किया गया है।
  • 'गोदान' में कृषक और कृषि-जीवन के विध्वंस की त्रासद कहानी है।
  • प्रेमचंद ने हिंदी उपन्यास को भारतीय मुहावरा दिया और उसे समाज और संस्कृति से जोड़कर नए आदर्श का प्रस्ताव पेश किया

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