{"product_id":"ek-saa","title":"Ek Saal","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003e''गुस्सा नहीं, दु:ख। एक सादा-सी बात बताऊँ। सफेद अमरीकन, तुम जानती हो, हम काले अमरीकन हैं। वे सफेद। अब नीग्रो शब्द का उपयोग वर्ज्य है। यह अपमानजनक माना जाता है।'' यहाँ रीटा खुलकर हँस दी। ''तो, काला कहना क्या कम अपमानजनक है? खैर। मैं बात कर रही थी, रिहाइश की। वैसे खुल्लमखुल्ला कोई भेदभाव नहीं बरतता, लेकिन यदि एक काला परिवार, किसी अच्छे मुहल्ले में घर खरीदना चाहे, यानी जहाँ सफेद लोग बहुतायत से रहते हों, तो खैर मना नहीं किया जाता। जाहिरी तौर पर, लेकिन फिर उस मुहल्ले से बाकी अमरीकन, यानी सफेद निकल जाते हैं। मकानों के भाव गिर जाते हैं। इसलिए कालों को घर देने से लोग कतराते हैं। तब फिर रफ्ता-रफ्ता वह इलाका काले लोगों का होकर रह जाता है। और तब यह रार मचती है, कि काले कितने फूहड़ हैं। बस, खाते हैं और सोते हैं। बेशऊर कहीं के! लेकिन अगर इसी तरह उन्हें दुरदुराया जाए, तो नतीजा यही होगा न!'' (इसी पुस्तक से)\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Mohit Publishers and Educational Aids","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48153364201717,"sku":"65294","price":340.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0755\/3099\/3909\/files\/447.webp?v=1778925782","url":"https:\/\/www.mohitpublishers.com\/products\/ek-saa","provider":"Mohit Publishers and Educational Aids","version":"1.0","type":"link"}