{"product_id":"मैं-बर्बाद-होना-चाहती-हूँ","title":"मैं बर्बाद होना चाहती हूँ","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eमलिका अमर शेख उस समय मात्र उन्नीस बरस की थीं जब वे मराठी के युग-प्रवर्तक कवि नामदेव ढसाल के साथ विवाह-बन्धन में बँध गईं। लेकिन जल्द ही यह शादी टूट गई। दलित पैंथर्स के सह-संस्थापक नामदेव न तो एक पति के रूप में, न पिता के रूप में, और न ही एक पुरुष के रूप में वैसे निकले जैसी उम्मीद मलिका ने की थी।\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eयह मुख्यतः उस विवाह की कहानी है, जिसमें हम उस स्त्री से मिलते हैं जो एक पुरुष-संसार में अपनी जगह ढूँढ़ने की कोशिश में है। लेकिन यह कहानी मराठी दलित आन्दोलन के अन्तर्विरोधों, मुम्बई शहर, उसके कवियों और एक्टिविस्टों की कहानी भी है।\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eमूल रूप से मराठी में प्रकाशित यह आत्मकथा छपते ही एक सनसनी बन गई थी। व्यक्तिगत बनाम राजनीतिक, वाम विचारधारा बनाम दलित आन्दोलन और अपने पति के प्रति प्रेम और घृणा के बीच फँसी एक स्त्री की यह आत्मकथा कई मायनों में एक दस्तावेज़ की हैसियत रखती है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Mohit Publishers and Educational Aids","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48246326493429,"sku":"65921","price":269.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0755\/3099\/3909\/files\/9789347265921.jpg?v=1780990840","url":"https:\/\/www.mohitpublishers.com\/products\/%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%81","provider":"Mohit Publishers and Educational Aids","version":"1.0","type":"link"}